विस्तार प्रभाग
परिचय
विस्तार प्रभाग सतत वन प्रबंधन, संरक्षण और आजीविका सुधार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विस्तार गतिविधियों पर केंद्रित है। विस्तार प्रभाग विशेष रूप से संस्थान द्वारा विकसित वानिकी संबंधी ज्ञान और प्रौद्योगिकियों को स्थानीय समुदायों, हितधारकों, वन विभागों के अग्रिम पंक्ति के क्षेत्रीय कर्मचारियों, अन्य हितधारकों आदि तक पहुँचाने पर काम करता है । विस्तार गतिविधियाँ हिमालयी वनों और वनों पर निर्भर समुदायों की बेहतरी के लिए अनुसंधान और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के बीच की खाई को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं ।
अधिदेश
संस्थान/परिषद के अनुसंधान निष्कर्षों और प्रौद्योगिकियों को हितधारकों तक पहुँचाने के लिए प्रभावी और नवीन/विस्तार पद्धतियों, रणनीतियों और विस्तार सामग्री का विकास
वन विज्ञान केंद्रों, प्रदर्शन गांव और कृषि विज्ञान केंद्रों, प्रशिक्षणों, कार्यशालाओं, जागरूकता कार्यक्रमों, रेडियो और टेलीविजन टॉक शो, मेलों, प्रदर्शनियों, संग्रहालयों आदि के माध्यम से अनुसंधान निष्कर्षों और प्रौद्योगिकियों का प्रयोगशाला से भूमि क्षेत्र तक विस्तार
प्रौद्योगिकि हस्तांतरण, समझौता ज्ञापन, प्रौद्योगिकियों के विपणन आदि में अन्य अनुसंधान प्रभागों को सहायता प्रदान करना
अन्य संस्थानों, उद्योगों और संगठनों के साथ साझेदारी, नेटवर्किंग और सहयोग को बढ़ावा देना और सुगम बनाना, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से मानव संसाधन का विकास करना
दृष्टि
हिमालयी वनों एवं उन पर निर्भर समुदायों के कल्याण हेतु अनुसंधान और उसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों के बीच की दूरी को कम करना।
प्राथमिकता वाले क्षेत्र
लक्षित समूहों तक अनुसंधान निष्कर्षों के प्रसार हेतु उपयुक्त विस्तार रणनीतियाँ विकसित करना
प्रशिक्षण, प्रदर्शनियों, प्रदर्शनों और किसान मेलों आदि के माध्यम से हितधारकों के बीच जागरूकता पैदा करना और प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण करना
अनुसंधान निष्कर्षों के व्यापक प्रसार के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (के.वी.के) के साथ नेटवर्किंग और संपर्क स्थापित करना
हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में स्थापित वन विज्ञान केंद्रों (वी.वी.के) के माध्यम से प्रौद्योगिकियों और सूचनाओं की एकल खिड़की वितरण प्रणाली
जागरूकता सृजन और संवेदीकरण के लिए पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण दिवसों और कार्यक्रमों का आयोजन
फोकस क्षेत्र
ज्ञान, कौशल विकास एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण हेतु प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम।
प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक प्रदर्शन हेतु डेमोंस्ट्रेशन प्लॉट की स्थापना।
मौजूदा प्रौद्योगिकियों को सुदृढ़ बनाने हेतु टीडीसी का उन्नयन।
प्रकाशन सामग्री, वृत्तचित्र, लघु वीडियो, पोस्टर, हैंडआउट, नमूने एवं प्रोटोटाइप का विकास तथा इनके माध्यम से अनुसंधान परिणामों का प्रसार।
वृक्ष उत्पादक मेला / किसान मेला का आयोजन एवं प्रदर्शनियों में सहभागिता।
सहभागिता बढ़ाने हेतु वेबसाइट, सोशल मीडिया एवं मोबाइल ऐप जैसे इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म।
मिशन LiFE एवं “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी सरकारी पहलों को बढ़ावा देकर संबंधित उद्देश्यों की पूर्ति।
चुनौतियाँ एवं अंतराल क्षेत्र
वन विज्ञान केंद्रों एवं टीडीसी में स्थान तथा आधारभूत संरचना के उन्नयन की आवश्यकता।
वन विज्ञान केंद्रों को सुदृढ़ बनाने हेतु प्रशिक्षण हॉल का निर्माण, कंप्यूटर, डिजिटल डिस्प्ले एवं इंटरनेट सुविधाओं की उपलब्धता आवश्यक है।
प्रमुख उपकरण
एलईडी प्रोजेक्टर
डिजिटल कैमरा
प्रमुख उपलब्धियां
भा.वा.अ.शि.प.-हि.व.अ.स., शिमला ने 04 वन विज्ञान केंद्र स्थापित किए हैं । संस्थान द्वारा अनुसंधान के विस्तार को प्रदर्शित करने और लोगों को वानिकी अनुसंधान के बारे में जागरूक करने के लिए जगतसुख, मनाली, हिमाचल प्रदेश; लोंगनी- धर्मपुर मंडी, हिमाचल प्रदेश; जानीपुर, जम्मू और फील्ड रिसर्च स्टेशन, नागबनी, जम्मू, जम्मू और कश्मीर और वन विज्ञान केंद्र सह शीत मरुस्थल फील्ड रिसर्च स्टेशन, बदामी बाग लेह, जम्मू और कश्मीर तथा एक प्रदर्शन गांव, बड़ागांव शिमला स्थापित किए हैं
नए वन विज्ञान केंद्र की स्थापना: भा.वा.अ.शि.प.-हि.व.अ.स., शिमला ने लोंगनी, धर्मपुर, मंडी में एक नया वन विज्ञान केंद्र स्थापित किया है । इस क्षेत्र में वानिकी अनुसंधान, संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंडी के धर्मपुर के पास लोंगनी में 4.83 हेक्टेयर क्षेत्र को नए वन विज्ञान केंद्र की प्रदर्शन नर्सरी स्थापित करने के लिए चुना गया था । लोंगनी में हिमाचल प्रदेश राज्य वन विभाग के पुराने विश्राम गृह भवन को वन विज्ञान केंद्र कार्यालय के लिए चुना गया और उसका जीर्णोद्धार किया गया। भा.वा.अ.शि.प.-हि.व.अ.स., शिमला और हिमाचल प्रदेश राज्य वन विभाग के बीच दो प्रमुख समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए । पहला समझौता ज्ञापन 11 जून 2020 को हस्ताक्षरित हुआ जो वीवीके और नर्सरी के रखरखाव पर केंद्रित था । दूसरा, समझौता ज्ञापन 12 फरवरी, 2021 को हुआ जिसमे लोंगनी, धर्मपुर, मंडी में एक नए वीवीके और प्रदर्शन नर्सरी की स्थापना की सुविधा प्रदान की
प्रदर्शन गाँव की स्थापना: संस्थान ने अपनी तकनीकों के प्रदर्शन के लिए बड़ागांव, शिमला में एक प्रदर्शन गाँव की स्थापना की है। बड़ागांव में चारा प्रजातियाँ उगाने और औषधीय पौधों के प्रदर्शन के लिए नर्सरी विकसित की गई है । इसके अलावा, बड़ागांव गाँव के पास चारा प्रजातियों का एक प्रदर्शन प्लॉट भी स्थापित किया गया है
प्रौद्योगिकी प्रदर्शन केंद्र (टीडीसी) की स्थापना: संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों और उत्पादों के प्रदर्शन हेतु, संस्थान परिसर में 1000 वर्ग मीटर क्षेत्र में एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन केंद्र (टीडीसी) स्थापित किया गया है । पिछले साढ़े तीन वर्षों में, छात्रों, शिक्षकों, वन क्षेत्र अधिकारियों, प्रशिक्षुओं और अन्य प्रतिनिधियों सहित लगभग 1576 आगंतुकों ने प्रौद्योगिकी प्रदर्शन केंद्र का दौरा किया और उन्हें संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों और उत्पादों पर केंद्रित व्याख्यानों और अनौपचारिक चर्चाओं के माध्यम से जागरूक किया गया
किसान मेलों का आयोजन: संस्थान ने पिछले पाँच वर्षों के दौरान वानिकी तकनीकों के प्रदर्शन और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए 04 किसान मेले आयोजित किए हैं । इन आयोजनों से किसान-वैज्ञानिक संवाद को बढ़ावा मिला और 690 ग्रामीणों और अन्य हितधारकों के बीच वानिकी तकनीकों के बारे में जागरूकता बढ़ी
प्रशिक्षण आयोजन: संस्थान के विस्तार प्रभाग ने पिछले पांच वर्षों के दौरान वानिकी के विभिन्न पहलुओं पर 30 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं जिसमें किसानों, प्रगतिशील किसानों, हिमाचल प्रदेश राज्य वन विभाग, लद्दाख वन विभाग और जम्मू वन विभाग के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों, महिला मंडल के सदस्यों, युवा क्लबों, सरकारी शिक्षकों, गैर सरकारी संगठनों और छात्रों सहित 1182 लोगों को प्रशिक्षण दिया है
दिवसों और कार्यक्रमों का आयोजन: संस्थान द्वारा पर्यावरण जागरूकता और संरक्षण हेतु अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न दिवस मनाए । ये कार्यक्रम विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और समुदाय को चर्चाओं में शामिल होने, ज्ञान साझा करने और स्थानीय समुदायों और छात्रों के बीच जागरूकता पैदा करने का एक मंच प्रदान करते हैं
प्रदर्शनियों में भागीदारी: भा.वा.अ.शि.प.-हि.व.अ.स., शिमला ने पिछले पांच वर्षों के दौरान विभिन्न संगठनों और एजेंसियों द्वारा आयोजित 04 प्रदर्शनियों में भाग लिया और अपनी अनुसंधान और विकास गतिविधियों का प्रदर्शन किया। संस्थान को 1 - 3 मार्च, 2024 को कंट्री इन, गांधीनगर, जम्मू, जम्मू और कश्मीर, केंद्र शशित प्र्तदेश में प्रयास इवेंट द्वारा आयोजित “गतिशील जम्मू एवम कश्मीर : आत्मनिर्भर भारत की ओर” "उत्कृष्ट भागीदारी पुरस्कार" प्राप्त हुआ
विस्तार सामग्री: भा.वा.अ.शि.प.-हि.व.अ.स., शिमला ने 44 विभिन्न वानिकी प्रजातियों के लगभग 24000 प्रकाशन विकसित किए हैं, जो मुख्य रूप से हिंदी में और कुछ अंग्रेजी में हैं, जिसमें वानिकी प्रजातियों से संबन्धित सामान्य जानकारी, प्रजातियों की खेती और संरक्षण, रोग प्रबंधन आदि शामिल हैं
वृत्तचित्रों (डॉकुमेंट्री फिल्म) का विकास: भा.वा.अ.शि.प.-हि.व.अ.स.,शिमला ने संस्थान की अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों, हिमालय के बांस, औषधीय पौधों की खेती, उत्तर पश्चिमी ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र के ठंडे रेगिस्तान, संस्थान द्वारा विकसित उत्पादों और उच्च हिमालय क्षेत्र के 03 महत्वपूर्ण उच्च समशीतोष्ण औषधीय पौधों की 05 औषधीय पौधों की किस्मों के विकास से संबन्धित कुल 07 वीडियो वृत्तचित्र विकसित किए हैं
औषधीय पौधों की किस्मों का विकास और विमोचन हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के भौगोलिक स्थानों का सर्वेक्षण करके कडु, निहानी एवं वन कक्कड़ी प्रजातियों के बेहतर आनुवंशिक स्टॉक की पहचान और चयन किया गया । हिमाचल प्रदेश के मनाली स्थित फील्ड रिसर्च स्टेशन, जगतसुख में फील्ड जीन बैंक (FGB) की स्थापना और रखरखाव किया गया । बहु-स्थान परीक्षणों के माध्यम से बेहतर जियोनोटाइप स्थापित किए गए और इन प्रजातियों की किस्मों का चयन उच्च उपज और कुल पिक्रोसाइड सामग्री (%), वैलेओपोट्रिएट्स सामग्री (%) और पोडोफिलोटॉक्सिन सामग्री (%) के आधार पर किया गया । Picrorhiza kurroa (कडु), Valeraina. jatamansi (निहानी/मुश्कबाला) और Podophyllum hexandrum (वनककड़ी) और हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में स्थिरता का परीक्षण किया गया । तीन औषधीय पौधों की पांच नई किस्में क्रमश पी. कुर्रोआ (02 यानी एचएफआरआई-पीके-1 और एचएफआरआई-पीके-2); V. jatamansi (02 यानी एचएफआरआई-वीजे-1 और एचएफआरआई-वीजे-2) और P. hexandrum (01 यानी एचएफआरआई-एसएच-1) को भा.वा.अ.शि.प.-हि.व.अ.स.,शिमला द्वारा विकसित किया गया है और सितंबर, 2023 में भा.वा.अ.शि.प,- देहरादून की वैरायटी रिलीजिंग कमेटी (वीआरसी) द्वारा जारी किया गया है । कडु, निहानी और वनककडी की यह किस्में हिमालय के समशीतोष्ण क्षेत्र में विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में स्थिर प्रकंद उपज और उच्च कुल पिक्रोसाइड, वैलियोपोट्रिएट्स, पोडोफिलोटॉक्सिन एवं स्थिरता प्रदर्शित करती हैं
पश्चिमी हिमालयी शीतोष्ण आर्बोरेटम: पश्चिमी हिमालयी शीतोष्ण आर्बोरेटम पॉटर हिल, शिमला को भा.वा.अ.शि.प.-हि.व.अ.स.,शिमला द्वारा रेड-लिस्टेड और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के एक्स-सीटू संरक्षण, रखरखाव और गुणन के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है । क्षेत्र की संकटग्रस्त वनस्पतियों को प्रदर्शित करने के लिए एक ऑर्किडेरियम/फर्न हाउस/बैम्बुसेटम और एक औषधीय पौधों की नर्सरी की स्थापना, आर्बरेटम का भू-दृश्यीकरण और पर्यावरण शिक्षा और पौधों पर सार्वजनिक जागरूकता को बढ़ावा देना शामिल है । उत्तर पश्चिम हिमालयी क्षेत्र के देशी वृक्षीय वनस्पतियों के आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण टैक्सा को आर्बोरेटम में संरक्षित किया गया है । उत्तर-पश्चिम हिमालय क्षेत्र के विभिन्न भागों से एकत्र की गई 145 वृक्ष प्रजातियों को अलग-अलग खंडों के रूप में आर्बरेटम में लगाया गया है । जिसमें जिम्नोस्पर्म अनुभाग, एसर ब्लॉक, रोसैसी ब्लॉक, अखरोट ब्लॉक, रोडोडेंड्रोन ब्लॉक, ओक ब्लॉक, आदि शामिल हैं । औषधीय पौधों के दुर्लभ अष्टवर्ग समूह के प्रदर्शन के लिए विशेष नर्सरी की स्थापना की गई है
परियोजनाएँ
नर्सरी/ वन विज्ञान केंद्र
जगतसुख, कुल्लू, हि॰प्र॰; लोंगनी- धर्मपुर, मंडी, हि॰प्र॰ ; जानीपुर, जम्मू, जम्मू-कश्मीर, के॰ प्र॰ और बादामी बाग, लेह लद्दाख, के॰ प्र॰
कर्मचारी
| क्र. सं. | नाम एवं पदनाम | संपर्क विवरण |
|---|---|---|
| डॉ. पवन कुमार, वैज्ञानिक एवं प्रभागाध्यक्ष | 94180-55916 | |
| डॉ. रंजना नेगी, वैज्ञानिक | ||
| श्रीमती शिल्पा, मुख्य तकनीकी अधिकारी | 85806-57787 | |
| श्री कुलवंत राय गुलशन, तकनीकी सहायक | 70187-01662 | |
| श्री राजेन्द्र पाल, तकनीकी सहायक | 70184-93458 | |
| श्री स्वराज सिंह, वरिष्ठ तकनीशियन | 70184-62159 | |
| श्री संत राम, उप रेंजर | 82196-65218 | |
| श्री मूरत सिंह, उप रेंजर | 98572-73492 | |
| श्री अजय ठाकुर, फॉरेस्टर | 98572-73492 | |
| श्री सुनील शर्मा, फॉरेस्टर | 70188-06279 | |
| श्री सुशील कुमार, वन रक्षक | 85804-26317 | |
| श्री आशीष रंजन, वन रक्षक | 79030-43929 | |
| श्री उगरसेन, वन रक्षक | 99911-33331 | |
| श्री संजीव कुमार, एमटीएस | 98175-50199 |
संपर्क
अधिक जानकारी हेतु कृपया संपर्क करें:
डॉ. राज कुमार वर्मा
वैज्ञानिक-जी एवं वन पारिस्थितिकी एवं जलवायु परिवर्तन प्रभागाध्यक्ष
आईसीएफआरई - हिमालयन फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, शिमला 171013