हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला |
हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला
हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला की स्थापना 1977 में एक उच्च स्तरीय कानीफर उत्थान अनुसंधान केंद्र के रूप में सिल्वर देवदार तथा प्रसरल वृक्ष के प्राकृतिक पुनजनन से संबंधित समस्याओं पर अनुसंधान के लिए स्थापित किया गया था। संस्थान ने अपनी गौरवशाली शुरूआत इस केंद्र से की तथा भा.वा.अ.शि.प. में वानिकी अनुसंधान के पुर्नसंस्थापन के समय, 1988 में भारत सरकार ने शीतोष्ण परितंत्र की समस्याओं को समझा तथा इस केंद्र को एक पूर्ण अनुसंधान संस्थान में अद्यतन कर दिया।
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निदेशक, हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला का संदेश
हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला के शासकीय वेबपेज में आपका स्वागत करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता है। संस्थान हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू व कश्मीर के राज्यों की अनुसंधान आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। परिषद् द्वारा संस्थान को एक उन्नत शीत मरुस्थल वन रोपण तथा चरागाह प्रबंधन के लिए उन्नत केंद्र घोषित कर दिया है ताकि इन कठोर क्षेत्रों के पारि-पुर्नर्स्थापन में उन्नत अनुसंधान किया जा सके।
मुझे आशा है कि इस वेबपेज पर दी गई सूचना दर्शकों के लिए अत्यंत उपयोगी होगी। वेबसाइट में सुधार के लिए आपके सुझावों का स्वागत है। |
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- महत्वपूर्ण पादप प्रजातियों के प्राकृतिक पुर्नजनन की वर्तमान स्थिति का आकलन करना।
- महत्वपूर्ण पादप प्रजातियों की कीमत को प्रभावित करने वाली पौधशाला, रोपण तथा बीज तकनीकों का विकास करना।
- खदानों वाले क्षेत्रों, तनाव स्थलों तथा अन्य भंगुर क्षेत्रों के पुनर्वासन के लिए तकनीकों का विकास करना।
- शीत मरुस्थलों की प्रजातियों का सर्वेक्षण, पहचान तथा प्रलेखन तथा महत्वपूर्ण पादपों में जैव संहति के लिए सही तकनीकों का विकास करना।
- उच्च पर्वतीय चरागाहों की उत्पादन क्षमता तथा निचले घास के मैदानों का सर्वेक्षण तथा आकलन करना।
- बीजों, पौधशाला, रोपण तथा प्राकृतिक वनों के लिए आर्थिक रूप से सही तथा पर्यावरण सहयोगी कीट तथा रोग प्रबंधन तकनीकों का विकास करना।
- व्यवसायिक रूप से महत्वपूर्ण अकाष्ठ वन उत्पादों के लिए कृषि तकनीकों के विकास सहित वनस्पति संरक्षण की स्थिति का आकलन करना।
- जैव ईंधन प्रजातियों सहित विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों को अपनी उनकी आपके संपूरक के लिए बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियों की पहचान तथा इनके बारे में जागरूकता लाना।
- शीतोष्ण पारितंत्रों में वैश्विक गर्मी से संबंधित विभिन्न पहलुओं का अध्ययन तथा विश्लेषण।
- वानिकी आधारित समुदायों की आजीविका को बढ़ाने के लिए मूल्य प्रभावी वानिकी प्रबंधन कार्यप्रणालियों को बढ़ाना तथा पहचान करना।
- शहरी वानिकी पर अनुसंधान/अध्ययन करना जो कि एक अन्य उभरता क्षेत्र है।
- पारिस्थितिकी, जैवविविधता संरक्षण, कीट गिराव, अकाष्ठ वन उपजों तथा वन संवर्ध महत्व से संबंधित मामलों के क्षेत्र में परामर्शी सेवाएं लेना।
संस्थान को शीत मरुस्थलों के पारि पुर्नस्थापन का राष्ट्रीय अधिदेश है उसी के अनुसार इसे शीत मरुस्थल वन रोपण तथा चरागाह प्रबंधन के लिए उन्नत केंद्र घोषित कर दिया गया है। |
| हाथ में ली गई परियोजानएं
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| अधिक जानकारी के लिए : http://hfri.icfre.gov.in |